Sohan Ka Raja
एक घमंडी बैल का अंत -एक छोटी सी दिल को छूने वाली कहानी
सोनपुर गाँव में सोहन नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास थोड़ी-बहुत खेती थी, लेकिन उसका गुज़ारा मुश्किल से ही चलता था। एक दिन उसका बचपन का दोस्त मोहन गाँव आया। मोहन ने देखा कि सोहन की हालत काफी तंग है, तो उसने कहा — "मित्र, तुम बड़े शहर जाकर कुछ मेहनत-मज़दूरी क्यों नहीं करते? वहाँ काम मिल जाएगा और घर भी चलेगा।
अगले दिन सवेरे-सवेरे सोहन शहर की ओर निकल पड़ा। रास्ते में एक घना जंगल पड़ता था। चलते-चलते दोपहर हो गई, धूप तेज़ थी और सोहन के पाँव थक चुके थे। वह एक बड़े पेड़ की छाँव में थोड़ा सुस्ताने के लिए लेट गया।
तभी सामने से एक बैल घूमता हुआ दिखा — तगड़ा, काले-सफेद रंग का, लेकिन अकेला और भटका हुआ। सोहन ने चारों ओर नज़र दौड़ाई — कोई मालिक नज़र नहीं आया। सोहन का मन पसीज गया। उसने बैल के पास जाकर उसे धीरे से सहलाया, ताज़ी घास खिलाई और प्यार से उसे अपने साथ गाँव ले आया।
गाँव लाकर सोहन ने उस बैल का नाम रखा — "राजा"। उसने राजा के गले में एक सुरीला घंटा बाँध दिया। जब राजा चलता तो वह घंटा टन-टन बजता और पूरा आँगन गूँज उठता। सोहन को ऐसा लगता जैसे उसके घर में सच में कोई राजा आ गया हो।
राजा के आने से सोहन की ज़िंदगी बदल गई। उसने मेहनत से खेत जोते, फसल अच्छी हुई। धीरे-धीरे उसकी स्थिति सुधरने लगी। कुछ समय बाद सोहन ने गाँव के साहूकार से थोड़ा कर्ज़ लेकर कुछ और बैल और गाएँ खरीद लीं। अब उसके बाड़े में कई जानवर थे — सब मिलकर रहते, साथ चरने जाते।
लेकिन राजा के गले में घंटा केवल उसी के पास था — और यही बात उसे भाने लगी। धीरे-धीरे उसे खुद पर घमंड आ गया। वह सोचने लगा, "मैं इन साधारण जानवरों जैसा नहीं हूँ। मेरे गले में घंटा है, मैं इनसे श्रेष्ठ हूँ।" उसने दूसरे जानवरों के साथ खाना-पीना बंद कर दिया, उनसे दूरी बना ली।
जब सोहन सारे जानवरों को जंगल में चराने ले जाता, तो राजा झुंड से अलग होकर दूर-दूर चरता। सोहन कई बार उसे वापस झुंड में ले आता, लेकिन थोड़ी देर में राजा फिर अलग हो जाता। सोहन को उसकी यह आदत अच्छी तरह पता थी, इसलिए वह हमेशा नज़र रखता था।
एक दिन सोहन किसी काम से बाहर गया और जानवरों को चराने उसका बेटा ले गया। वह लड़का थका हुआ था और जंगल में पहुँचते ही एक ऊँचे पेड़ पर चढ़कर सो गया। राजा की इस आदत से वह बिल्कुल अनजान था।
राजा अपनी आदत के अनुसार धीरे-धीरे झुंड से अलग होता चला गया और घने जंगल में जा पहुँचा।
वहाँ एक
भूखा शेर भोजन की तलाश में घूम रहा था। जब उसने दूर से घंटे की टन-टन आवाज़ सुनी, तो
वह चुपके से उस दिशा में बढ़ने लगा। पास आकर उसने देखा कि एक मोटा-ताज़ा बैल बिल्कुल
अकेला चर रहा है — न साथी, न रखवाला। शेर ने पलक झपकते ही राजा पर पीछे से हमला किया
और उसे मार गिराया।
📖 शिक्षा: घमंड मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो अपने
साथियों से दूर हो जाता है, वह संकट में अकेला पड़ जाता है।
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Written by Amit Mehrish
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Nice Story
जवाब देंहटाएंVery nice and motivated story
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